Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 592
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1वस्तुतस्तु अवतार गोविंद राधे।
2जीव कल्याण हित होते हैं बता दे॥ 6826॥
3हरि हैं अलौकिक गोविंद राधे।
4भक्त हित लौकिक जन्म हो बता दे॥ 6827॥
5अनन्त अवतार हुए गोविंद राधे।
6स्वयं भगवान भी ना संख्या बता दे॥ 6828॥
7सब अवतार नित्य गोविंद राधे।
8दिव्य जन्म कर्म जामें होते हैं बता दे॥ 6829॥
9अवतार सभी पूर्ण गोविंद राधे।
10शक्ति प्राकट्य कई नाम दिला दे॥ 6830॥
11अवतार पूर्णतम गोविंद राधे।
12जब हरि गुण सब व्यक्त हों बता दे॥ 6831॥
13अवतार पूर्णतर गोविंद राधे।
14पूर्णतम ते कम व्यक्त गुण बता दे॥ 6832॥
15अवतार पूर्ण तो है गोविंद राधे।
16जब हरि गुण अल्प व्यक्त हों बता दे॥ 6833॥
17व्यक्त गुण द्वारा ही गोविंद राधे।
18अवतारों के कई भेद बता दे॥ 6834॥
19अवतार छे प्रकार गोविंद राधे।
20पुरुष गुण लीलावतार बता दे॥ 6835॥
21मन्वन्तर युग गोविंद राधे।
22अवतार आवेश छठवाँ बता दे॥ 6836॥
23बुद्ध और कल्कि दोनों गोविंद राधे।
24हैं आवेश अवतार बता दे॥ 6837॥