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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अवतार · पृष्ठ 591

Reading 89 of 452 · Source nos. 6814–6825 · Source PDF 94

1भजनीय के बिना गोविंद राधे।

2भक्त की भक्ति असम्भव बता दे॥ 6814॥

3एक अवतार हेतु गोविंद राधे।

4नर को अपना कर्तव्य सिखा दे॥ 6815॥

5चार आश्रम हित गोविंद राधे।

6हरि भिन्न भिन्न अवतार करा दे॥ 6816॥

7याते योगारूढ़ गोविंद राधे।

8आदर्श है रास लीला बता दे॥ 6817॥

9एक अवतार हेतु गोविंद राधे।

10नाम रूप गुण लीला जग को दिला दे॥ 6818॥

11एक अवतार हेतु गोविंद राधे।

12भक्तों की इच्छा को पूरी करा दे॥ 6819॥

13एक अवतार हेतु गोविंद राधे।

14अधम उधारन नाम दिला दे॥ 6820॥

15जग में न आवे जो गोविंद राधे।

16हरि दीनबंधुता हो व्यर्थ बता दे॥ 6821॥

17जग में न आवे जो गोविंद राधे।

18पतितपावनता व्यर्थ हो बता दे॥ 6822॥

19जग में न आवे जो गोविंद राधे।

20हरि सौशील्य गुण व्यर्थ हो बता दे॥ 6823॥

21जग में न आवे जो गोविंद राधे।

22हरि औदार्य गुण व्यर्थ हो बता दे॥ 6824॥

23जग में न आवे जो गोविंद राधे।

24हरि कारुण्य गुण व्यर्थ हो बता दे॥ 6825॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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