Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 590
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1केतकी की एक शक्ति गोविंद राधे।
2केतकी में निन्दनीय काँटे बना दे॥ 6802॥
3केतकी की एक शक्ति गोविंद राधे।
4सुन्दर सुगन्धि युक्त फूल बना दे॥ 6803॥
5ऐसे हरि शक्ति एक गोविंद राधे।
6निन्दनीय जगत प्रपंच बना दे॥ 6804॥
7हरि की ही एक शक्ति गोविंद राधे।
8आत्मारामकर्षी दिव्य रूप बना दे॥ 6805॥
9एक अवतार हेतु गोविंद राधे।
10दैत्य नाश धर्म संस्थापन बता दे॥ 6806॥
11दैत्य नाशादि कार्य गोविंद राधे।
12स्वयं भगवान का नहीं है बता दे॥ 6807॥
13दैत्य नाशादि कार्य गोविंद राधे।
14युगावतार कृष्ण का है बता दे॥ 6808॥
15“परित्राणाय” गीता गोविंद राधे।
16श्लोक का अर्थ गम्भीर बता दे॥ 6809॥
17साधु हैं गोपी जन गोविंद राधे।
18गोपी त्राण तो कृष्ण ते हो बता दे॥ 6810॥
19दुष्कृत शिशुपाल कंस गोविंद राधे।
20जिनके वध में थे शक्त कृष्ण ही बता दे॥ 6811॥
21साधारण दुष्कृती को गोविंद राधे।
22दुष्कृत ही आपु दण्ड दिला दे॥ 6812॥
23धर्म है भक्ति का गोविंद राधे।
24बिना कृष्ण के कैसे होता बता दे॥ 6813॥