Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 588
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1जिसकी जैसी भावना हो गोविंद राधे।
2श्यामा श्याम उसको भी वैसा दिखा दे॥ 6778॥
3आतिशी शीशे पै गोविंद राधे।
4सूर्य किरन चमक चौगुनी बढ़ा दे॥ 6779॥
5कोयले के ढेर पै गोविंद राधे।
6सूर्य किरन चमक शून्य बता दे॥ 6780॥
7एक श्रीकृष्ण को ही गोविंद राधे।
8द्रष्टा की दृष्टि दस रस का दिखा दे॥ 6781॥
9मल्लों को वज्र सम गोविंद राधे।
10लगे श्याम यह रौद्ररस है बता दे॥ 6782॥
11नरों को नरवर गोविंद राधे।
12लगे श्याम अद्भुत रस है बता दे॥ 6783॥
13स्त्रियों को कामदेव गोविंद राधे।
14लगे श्याम शृंगार रस है बता दे॥ 6784॥
15गोपों को निजजन गोविंद राधे।
16लगे श्याम यह हास्य रस है बता दे॥ 6785॥
17दुष्ट राजाओं को गोविंद राधे।
18लगे शास्ता वीर रस है बता दे॥ 6786॥
19माता पिता को शिशु गोविंद राधे।
20लगे श्याम वात्सल्य रस है बता दे॥ 6787॥
21कंस को तो काल सम गोविंद राधे।
22लगे श्याम रस है भयानक बता दे॥ 6788॥
23मूर्खों को विराट गोविंद राधे।
24लगे श्याम रस वीभत्स बता दे॥ 6789॥