Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 586
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1“इन्द्रो मायाभिः” गोविंद राधे।
2मंत्र हरि को साकार बता दे॥ 6754॥
3“वेदाहमेतं” मंत्र गोविंद राधे।
4हरि को सगुण साकार बता दे॥ 6755॥
5“इदं विष्णुः” वेदमंत्र गोविंद राधे।
6हरि का वामनावतार बता दे॥ 6756॥
7तुम स्त्री तुम पुरुष गोविंद राधे।
8कुमार कुमारी वृद्घ वेद बता दे॥ 6757॥
9“अजायमानो” वेद गोविंद राधे।
10मंत्र हरि का बहुजन्म बता दे॥ 6758॥
11कृष्ण हैं अजायमान गोविंद राधे।
12कृष्ण हैं अनन्त जन्मयुक्त बता दे॥ 6759॥
13समस्त प्राणियों के गोविंद राधे।
14अंतरात्मा श्रीकृष्ण बता दे॥ 6760॥
15हरि ही जगत हित गोविंद राधे।
16योगमाया ते देही ज्यों दिखा दे॥ 6761॥
17“अजोऽपि सन्” श्लोक गोविंद राधे।
18माया का अर्थ संकल्प बता दे॥ 6762॥
19अज अव्यय ईश्वर गोविंद राधे।
20को योगमाया अवतार बना दे॥ 6763॥
21हरि सर्वशक्ति युक्त गोविंद राधे।
22स्वेच्छा ते निज दिव्य देह बना दे॥ 6764॥
23हरि जन्म हरि कर्म गोविंद राधे।
24दिव्य जो जाने हरि धाम दिला दे॥ 6765॥