Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा नाम महिमा · पृष्ठ 574
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1राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
2सोये श्याम रोम रोम राधे राधे गा दे॥ 6617॥
3राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
4ब्रज की लता पता भी राधे राधे गा दे॥ 6618॥
5राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
6बरबस ब्रह्मसमाधि भुला दे॥ 6619॥
7राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
8सनकसमाधि की भी सनक छुड़ा दे॥ 6620॥
9राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
10निर्विकल्प को सविकल्प बना दे॥ 6621॥
11राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
12मुक्त केमरे मन को भी जिला दे॥ 6622॥
13राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
14मुक्त को भी प्रेमसूत्रबद्ध बना दे॥ 6623॥
15राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
16शुक ते विदेह को सदेह बना दे॥ 6624॥
17राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
18जनक सनक को भी रसिक बना दे॥ 6625॥
19राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
20नीरस ब्रह्म को भी रसिक बना दे॥ 6626॥
21राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
22आठों याम हरि जपें रूपध्यान साधे॥ 6627॥
23राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
24कोटि वैकुण्ठ सुख जापै लुटा दे॥ 6628॥