Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा नाम महिमा · पृष्ठ 573
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1राधा पद अरविन्द गोविंद राधे।
2मकरन्द हित मन मधुप बना दे॥ 6605॥
3राधा तेरे उर में हैं गोविंद राधे।
4बन जा पतंग डोरी राधा को थमा दे॥ 6606॥
5राधे राधे नाम सुनि गोविंद राधे।
6काल वाकेपापों की बही को जला दे॥ 6607॥
7राधे नाम रस मद गोविंद राधे।
8ब्रह्मलीन को भी मदमत्त करा दे॥ 6608॥
9राधे नाम सुनि शुक गोविंद राधे।
10छे मास तक तनु चेतना गमा दे॥ 6609॥
11राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
12भगवान भव को भवानी बना दे॥ 6610॥
13राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
14ऊधो वर माँगें मोहिं वृक्ष बना दे॥ 6611॥
15राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
16ब्रह्मा कहे मोहिं ब्रज पक्षी बना दे॥ 6612॥
17राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
18मुक्त आत्मा को पुनि देह दिला दे॥ 6613॥
19राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
20श्याम होंय मूर्च्छित सुनि नाम आधे॥ 6614॥
21राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
22सुखरूप ब्रह्म निज सुख को भुला दे॥ 6615॥
23राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे।
24सुख देने वाले श्याम को भी रुला दे॥ 6616॥