Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा कृष्ण · पृष्ठ 569
Reading 68 of 452 · Source nos. 6585–6586 · Source PDF 72
1भुक्ति मुक्तिगंधशून्य गोविंद राधे।
2उर है तीनों का ही बता दे॥ 6585॥
3तीनों का स्वरूप बस गोविंद राधे।
4तीनों ही एकमात्र जानें बता दे॥ 6586॥