Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा कृष्ण · पृष्ठ 568
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1दोनों को ही दोनों कहें गोविंद राधे ।।
2झूठ ही निठुर सब को धोखा दें॥ 6573॥
3करुणा में होड़ करें गोविंद राधे।
4इक ते इक बढ़ि जनहिं कृपा दें॥ 6574॥
5परम तत्व श्रीकृष्ण गोविंद राधे।
6सत चित आनन्दघन हैं बता दे॥ 6575॥
7कृष्ण की ह्लादिनी गोविंद राधे।
8शक्ति हैं राधारानी बता दे॥ 6576॥
9कृष्ण संधिनी शक्ति गोविंद राधे।
10बन्यो वृन्दावन धाम बता दे॥ 6577॥
11कृष्ण की चित् शक्ति गोविंद राधे।
12योगमाया स्वरूप शक्ति बता दे॥ 6578॥
13कृष्ण योगमाया ही गोविंद राधे।
14आयोजन करें लीला का बता दे॥ 6579॥
15मधुमंगल की माँ गोविंद राधे।
16पूर्णमासी ही योगमाया बता दे॥ 6580॥
17स्वयं श्री राधारानी गोविंद राधे।
18कायव्यूहरूपा बनीं गोपियाँ बता दे॥ 6581॥
19राधा कृष्ण गोपी मिलि गोविंद राधे।
20ब्रजरस पियें अरु पिलावें बता दे॥ 6582॥
21राधा कृष्ण गोपीजन गोविंद राधे।
22तीनों का माधुर्य एक है बता दे॥ 6583॥
23तीनों एक दूसरे की गोविंद राधे।
24सुखदात्री हैं मूर्तियाँ बता दे॥ 6584॥