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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

श्री राधा कृष्ण · पृष्ठ 567

Reading 66 of 452 · Source nos. 6561–6572 · Source PDF 70

1दोनों ही ब्रह्म हैं गोविंद राधे।

2दोनों में अचिन्त्य भेदाभेद बता दे॥ 6561॥

3दोनों हैं अवतारी गोविंद राधे।

4यह तत्वज्ञान मन बुद्धि को करा दे॥ 6562॥

5मधुर मधुर लीला करें गोविंद राधे।

6जिन्हें सुनि विषयी भी मन को लगा दे॥ 6563॥

7विषयी विरक्त हो या गोविंद राधे।

8ज्ञानी हो लीला गुन दास बना दे॥ 6564॥

9दर्शन जनि चाहो गोविंद राधे।

10सुना है कि दर्शन प्यास बढ़ा दे॥ 6565॥

11श्यामरस गौररस गोविंद राधे।

12दोनों का मिश्रण मन को पिला दे॥ 6566॥

13प्रेम अवतार दोऊ गोविंद राधे।

14पात्रापात्र देखे बिनु प्रेम लुटा दे॥ 6567॥

15शिशु ज्यों पुकारो रो के गोविंद राधे।

16भाजे भाजे अइहैं दोऊ गल बँहियाँ दे॥ 6568॥

17बाँह फैलाये खरे गोविंद राधे।

18तू भी मन बुधि दै के भुज फैला दे॥ 6569॥

19पल पल परखत गोविंद राधे।

20तू भी तन मन अरु प्राण लुटा दे॥ 6570॥

21मन करु सुमिरन गोविंद राधे।

22भोरी भारी राधे गोविंद सीधे सादे॥ 6571॥

23सीधे सादे ना होते तो गोविंद राधे।

24पूतना को कैसे निज लोक दिला दे॥ 6572॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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