Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा कृष्ण · पृष्ठ 562
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1ललिता कह श्यामा जू गोविंद राधे ।
2मैं जानूँ तुम प्यारी श्याम पिय बता दे॥ 6501॥
3राधा कह सखि तू तो गोविंद राधे।
4ऊपर की बातें ही जाने बता दे॥ 6502॥
5श्याम ना प्रियतम गोविंद राधे।
6मैं ना हूँ उनकी प्यारी बता दे॥ 6503॥
7हम हो गये वे गोविंद राधे।
8वे हो गये हम भेद ना बता दे॥ 6504॥
9विरह वेदना गोविंद राधे।
10बरबस दोनों को एक बना दे॥ 6505॥
11श्यामा श्याम रूप दो हैं गोविंद राधे।
12दोनों हैं रस दोनों रसिक बता दे॥ 6506॥
13श्यामा श्याम रूप दो हैं गोविंद राधे।
14दोनों मधु हैं दोनों भ्रमर बता दे॥ 6507॥
15राधापद मधुकर गोविंद राधे।
16राधाप्राणेश्वर कृष्ण हैं बता दे॥ 6508॥
17राधा आराधित गोविंद राधे।
18गोपीजनमोहन कृष्ण हैं बता दे॥ 6509॥
19“कृषि” धातु “भू” वाची गोविंद राधे।
20“ण” है आनन्दवाची बता दे॥ 6510॥
21सब की सत्ता तो गोविंद राधे।
22एकमात्र श्रीकृष्ण ही हैं बता दे॥ 6511॥
23सब की आनन्ददात्री गोविंद राधे।
24एकमात्र हैं राधारानी बता दे॥ 6512॥