Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 553
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1“रमयति श्रीकृष्णं” गोविंद राधे।
2व्युत्पत्ति ते रमा शब्द बता दे॥ 6422॥
3रमण करावें राधा गोविंद राधे।
4कृष्ण को याते राधा रमा हैं बता दे॥ 6423॥
5रमण करावें रमा गोविंद राधे।
6विष्णु को वैकुण्ठ में ही बता दे॥ 6424॥
7श्री लक्ष्मी का गोविंद राधे।
8श्री नाम राधा का भी है बता दे॥ 6425॥
9लक्ष्मी कृष्ण दासी हैं गोविंद राधे।
10राधा कृष्ण स्वामिनी हैं वेद बता दे॥ 6426॥
11लक्ष्मी हरि पग चापैं गोविंद राधे।
12हरि राधा पग चापैं भेद बता दे॥ 6427॥
13राधा ब्रजरस बाँटैं गोविंद राधे।
14लक्ष्मी ललचायें रस पायें ना बता दे॥ 6428॥
15राधा की समर्था रति गोविंद राधे।
16लक्ष्मी की समंजसा ही रति है बता दे॥ 6429॥
17धन्य धाम बरसानो गोविंद राधे।
18जहाँ लता पता भी राधे राधे गा दे॥ 6430॥
19बरसाने जाके हरि गोविंद राधे।
20सिर के मुकुट ते बुहारी लगा दे॥ 6431॥
21सबके हैं सेव्य श्याम गोविंद राधे।
22श्याम की भी सेव्या हैं श्यामा बता दे॥ 6432॥
23“संतताश्रव केशवा” का गोविंद राधे।
24भाव कृष्णस्वामिनी हैं राधा बता दे॥ 6433॥