Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 552
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1कारुण्य की सार गोविंद राधे।
2ठकुरानी राधा रानी बता दे॥ 6410॥
3वैदग्ध्य की सार गोविंद राधे।
4ठकुरानी राधा रानी बता दे॥ 6411॥
5रति केलि की सार गोविंद राधे।
6ठकुरानी राधा रानी बता दे॥ 6412॥
7सर्व सार की सार गोविंद राधे।
8ठकुरानी राधा रानी बता दे॥ 6413॥
9राधे रानी ठकुरानी गोविंद राधे।
10प्रेम रूप रस खानी रसिक बता दे॥ 6414॥
11राधे रानी ठकुरानी गोविंद राधे।
12वृन्दावन रजधानी रसिक बता दे॥ 6415॥
13राधे रानी ठकुरानी गोविंद राधे।
14दिव्य प्रेम सुख दानी रसिक बता दे॥ 6416॥
15राधे रानी ठकुरानी गोविंद राधे।
16चक्रपाणी स्वामिनी रसिक बता दे॥ 6417॥
17“श्रयते इति श्री” अर्थ गोविंद राधे।
18श्रीकृष्णसेविका हैं लक्ष्मी बता दे॥ 6418॥
19“श्रीयते इति श्री” अर्थ गोविंद राधे।
20श्रीकृष्णसेव्या हैं राधा बता दे॥ 6419॥
21वैकुण्ठ लोक में तो गोविंद राधे।
22सेव्या हैं सबकी लक्ष्मी बता दे॥ 6420॥
23किन्तु ब्रजधाम में तो गोविंद राधे।
24दासी बनि वास करें लक्ष्मी बता दे॥ 6421॥