Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 549
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1इनके वसन हैं गोविंद राधे।
2पुष्प अनार ज्यों अरुण बता दे॥ 6374॥
3रंगदेवी सखी गोविंद राधे।
4करें अलंकार नित्य बता दे॥ 6375॥
5विविध भूषनन गोविंद राधे।
6तनु अंगनि पहिरावें बता दे॥ 6376॥
7इनका तनु अंग गोविंद राधे।
8कमल किंजल्क सदृश बता दे॥ 6377॥
9इनकी सारी है गोविंद राधे।
10जपा कुसुम रँग वारी बता दे॥ 6378॥
11आठवीं सुदेवी सखी गोविंद राधे।
12समस्त गुण सम्पन्न बता दे॥ 6379॥
13वेणी गुम्फन गोविंद राधे।
14आदि शृंगार में हैं निपुण बता दे॥ 6380॥
15अंजन लगावें दृग गोविंद राधे।
16शुक सारिका को पढ़ावें बता दे॥ 6381॥
17इनकी सारी है गोविंद राधे।
18लाल रंग वारी प्यारी बता दे॥ 6382॥
19प्राण सखी प्रेष्ठ सखी गोविंद राधे।
20नित्य सखी क्रमशः श्रेष्ठ बता दे॥ 6383॥
21प्राण सखी आदि गोविंद राधे।
22श्रीकृष्ण में ना करें रमन बता दे॥ 6384॥
23प्राण सखी आदि गोविंद राधे।
24श्यामा श्याम मिलन करावें बता दे॥ 6385॥