Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 548
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1समस्त व्यंजनों की गोविंद राधे।
2रचना में अति चतुर बता दे॥ 6362॥
3इनका है अंग वर्ण गोविंद राधे।
4चम्पक पुष्प छटा सदृश बता दे॥ 6363॥
5चित्रलेखा सखी गोविंद राधे।
6सुरभित सलिल पिवावें बता दे॥ 6364॥
7पेय पदार्थ सब गोविंद राधे।
8चित्रलेखा ही पिवावें बता दे॥ 6365॥
9इनकी है अंग कान्ति गोविंद राधे।
10केशर की कान्ति जैसी बता दे॥ 6366॥
11स्वर्णिम कान्तिमय गोविंद राधे।
12वस्त्र इनके मन भाये बता दे॥ 6367॥
13तुंगविद्या सखी गोविंद राधे।
14गान विद्या में हैं निपुण बता दे॥ 6368॥
15इनकी तो अंग छवि गोविंद राधे।
16गौरी ते भी है गोरी बता दे॥ 6369॥
17इनको प्रिय हैं गोविंद राधे।
18कपिल वर्ण के वस्त्र बता दे॥ 6370॥
19इन्दुलेखा सखी गोविंद राधे।
20युगल विलास की विदुषी बता दे॥ 6371॥
21वशीकरण मंत्र गोविंद राधे।
22मोहिनी विधि भी जानें बता दे॥ 6372॥
23इनकी तनु दुति गोविंद राधे।
24हरिताल के रंग की है बता दे॥ 6373॥