Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 546
Reading 46 of 452 · Source nos. 6338–6349 · Source PDF 49
1कृष्ण ने टाल दिया गोविंद राधे।
2पता नहीं मुझे क्यों फफोले बता दे॥ 6338॥
3आग्रह करने पै गोविंद राधे।
4कृष्ण ने कहा सुनो रु क्मिणी बता दे॥ 6339॥
5तुमने जो राधा को गोविंद राधे।
6अति उष्ण दूध पिलाया बता दे॥ 6340॥
7याते मम चरणों में गोविंद राधे।
8उष्ण दूध के हैं फफोले बता दे॥ 6341॥
9रुक्मिणी ने पूछा पिय गोविंद राधे।
10मुख में फफोले पड़ने चाहिये बता दे॥ 6342॥
11कृष्ण ने कहा मेरे गोविंद राधे।
12चरण रहें राधा उर में बता दे॥ 6343॥
13यह सुनि सब रानी गोविंद राधे।
14राधा की जय जयकार करा दे॥ 6344॥
15सब रानियों ने माना गोविंद राधे।
16राधाप्रेम की उपमा ना बता दे॥ 6345॥
17राधा कह मेरे तनु गोविंद राधे।
18रोम रोम कोटि कोटि नेत्र बना दे॥ 6346॥
19फिर भी न तृप्ति हो गोविंद राधे।
20श्याम लखि श्यामा प्रेम ऐसा बता दे॥ 6347॥
21प्रेमरस प्यास की ही गोविंद राधे।
22चिन्मय मूर्ति राधारानी बता दे॥ 6348॥
23भानुनन्दिनी की हैं गोविंद राधे।
24अष्ट महासखी प्रमुख बता दे॥ 6349॥