Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 545
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1डेरे पै ले जा के गोविंद राधे।
2राधा का किया सत्कार बता दे॥ 6326॥
3भोजन उपरान्त गोविंद राधे।
4कृष्ण ने कहा रुक्मिणी ते बता दे॥ 6327॥
5रुक्मिणी जाओ तुम गोविंद राधे।
6राधा को दूध पिला आओ बता दे॥ 6328॥
7रुक्मिणी राधा को गोविंद राधे।
8दूध पिलाया राधा लौटीं बता दे॥ 6329॥
9नित्य नियमानुसार गोविंद राधे।
10चरण दबाने गईं रुक्मिणी बता दे॥ 6330॥
11चरण दबाते हुए गोविंद राधे।
12देखा कृष्णपग में फफोले बता दे॥ 6331॥
13रुक्मिणी चकित भईं गोविंद राधे।
14तुरत बुलाया रानियों को बता दे॥ 6332॥
15सब को दिखाया पग गोविंद राधे।
16सब रानियाँ भईं चकित बता दे॥ 6333॥
17कृष्ण ते पूछने का गोविंद राधे।
18साहस किसी का ना हो सका बता दे॥ 6334॥
19कृष्ण ने आँख खोला गोविंद राधे।
20पूछा यहाँ सब एकत्र क्यों बता दे॥ 6335॥
21रुक्मिणी ने नम्रता ते गोविंद राधे।
22पग में फफोले दिखाये बता दे॥ 6336॥
23पुनि पूछा प्रियतम गोविंद राधे।
24पग के फफोले का कारण बता दे॥ 6337॥