Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 544
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1सिद्धाश्रम तीर्थ में गोविंद राधे।
2रानियों समेत गये कृष्ण भी बता दे॥ 6314॥
3कृष्ण की रानियाँ गोविंद राधे।
4राधा गोपी गुण सुनती थीं बता दे॥ 6315॥
5कृष्ण कहते थे सदा गोविंद राधे।
6धन्य धन्य राधा गोपी प्रेम बता दे॥ 6316॥
7आज शुभ दिन लखि गोविंद राधे।
8रानियों ने कहा कृष्ण ते बता दे॥ 6317॥
9हम सब रानियों की गोविंद राधे।
10राधा गोपी मिलन की लालसा बता दे॥ 6318॥
11कृष्ण की आज्ञा ते गोविंद राधे।
12कृष्ण साथ गयीं राधा निकट बता दे॥ 6319॥
13सखि संग श्यामा लखि गोविंद राधे।
14रानियों को हुआ अति हर्ष बता दे॥ 6320॥
15राधा ने किया सबका गोविंद राधे।
16स्वागत सत्कार प्यार ते बता दे॥ 6321॥
17राधा ने कहा चन्द्र गोविंद राधे।
18एक है चकोर अनन्त बता दे॥ 6322॥
19ऐसे ही कृष्ण एक गोविंद राधे।
20उनकी हैं सेविका अनन्त बता दे॥ 6323॥
21राधा रूप शील गुण गोविंद राधे।
22सौन्दर्य लखि रानी चकित बता दे॥ 6324॥
23पुनि उन रानियों ने गोविंद राधे।
24राधा ते कहा चलो डेरे पै बता दे॥ 6325॥