Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 542
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1शुभ्र दशनावलि गोविंद राधे।
2कान्ति ही कुंद कलिका है बता दे॥ 6290॥
3भाल की लाल बिंदी गोविंद राधे।
4विकसित गुल लाल फूल बता दे॥ 6291॥
5सुन्दर नासा है गोविंद राधे।
6मानो सुघर स्वर्णफूल बता दे॥ 6292॥
7तनु में जहाँ तहाँ गोविंद राधे।
8मुक्ता हैं जूही पुष्प बता दे॥ 6293॥
9लाली के नैन हैं गोविंद राधे।
10मानो खंजन पक्षी बता दे॥ 6294॥
11लाली के अंग प्रति गोविंद राधे।
12दिव्य माधुर्यनिर्झर हैं बता दे॥ 6295॥
13लाली की भुजायें हैं गोविंद राधे।
14दोनों रस वल्लरियाँ बता दे॥ 6296॥
15एक बार कृष्ण ने गोविंद राधे।
16दानघाटी में रोका राधा को बता दे॥ 6297॥
17उस समय राधा के गोविंद राधे।
18हर्ष संग सात भाव प्रकटे बता दे॥ 6298॥
19हर्ष, गर्व, अभिलाषा गोविंद राधे।
20स्मित, भय, द्वेष, रुदन, क्रोध बता दे॥ 6299॥
21आठों के मिलन को तो गोविंद राधे।
22किलकिंचित् महाभाव बता दे॥ 6300॥
23आठों के मिलन ते तो गोविंद राधे।
24प्राप्त सुख कृष्ण को भी तृप्त करा दे॥ 6301॥