Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 540
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1श्वेत स्मिता मधुरा गोविंद राधे।
2चारु सौभाग्य रेखाढ्या बता दे॥ 6266॥
3करुणा विनीता पूर्णा गोविंद राधे।
4संगीत प्रसाराभिज्ञा बता दे॥ 6267॥
5सुविलासा रम्यवाक् गोविंद राधे।
6नर्मपंडिता लज्जाशीला बता दे॥ 6268॥
7विदग्धा सुमर्यादा गोविंद राधे।
8पाटवान्विता धैर्यशालिनी बता दे॥ 6269॥
9गोकुल प्रेम वसति गोविंद राधे।
10महाभाव उत्कर्षतर्षिणी बता दे॥ 6270॥
11गांभीर्यशालिनी गोविंद राधे।
12यश ते पूर्ण जग व्याप्त बता दे॥ 6271॥
13गुर्वर्पित गुरुस्नेहा गोविंद राधे।
14सखीप्रणयाधीना बता दे॥ 6272॥
15हरि प्रियावली मुख्या गोविंद राधे।
16नित संतताश्रवकेशवा बता दे॥ 6273॥
17उपर्युक्त गुण पच्चीस गोविंद राधे।
18श्री राधा के दिव्य दिव्य हैं बता दे॥ 6274॥
19राधा का वर्ण श्वेत गोविंद राधे।
20चम्पा कुसुम के सदृश बता दे॥ 6275॥
21राधा की मुख कान्ति गोविंद राधे।
22शारदीय शशिगर्वहारिणी बता दे॥ 6276॥
23राधा श्री विग्रह गोविंद राधे।
24अगणित चन्द्र कान्ति सदृश बता दे॥ 6277॥