Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 536
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1राधा की दशा लखि गोविंद राधे।
2ललिता ने पूछा दुख क्या है बता दे॥ 6218॥
3राधा ने कहा सखि गोविंद राधे।
4बात अपयश की कैसे बता दे॥ 6219॥
5ललिता कह स्वामिनी जू गोविंद राधे।
6मैं तो हूँ अंतरंग मो को बता दे॥ 6220॥
7राधा ने कहा सखि गोविंद राधे।
8मेरा मर जाना ही उचित बता दे॥ 6221॥
9तीन तीन पुरु षों ते गोविंद राधे।
10मेरा हो गया है अनुराग बता दे॥ 6222॥
11ललिता कह श्यामा जू गोविंद राधे।
12वे तीन कौन हैं नाम बता दे॥ 6223॥
13राधा ने बताया नाम गोविंद राधे।
14अरु वंशी अरु चित्र घटना बता दे॥ 6224॥
15ललिता ने कहा हँसि गोविंद राधे।
16स्वामिनी जू तुम बड़ी भोरी बता दे॥ 6225॥
17जिसकी वंशी सुनी गोविंद राधे।
18जिसका चित्र देखा तुमने बता दे॥ 6226॥
19जिसका सुना नाम गोविंद राधे।
20तीनों एक ही हैं नन्दलाल बता दे॥ 6227॥
21एक दिन राधारानी गोविंद राधे।
22निज प्रांगण में बैठी थीं बता दे॥ 6228॥
23प्रांगण मणि मध्य गोविंद राधे।
24देखा निज प्रतिबिम्ब बता दे॥ 6229॥