Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 530
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1बार बार देखें छवि गोविंद राधे।
2बार बार प्यास बढ़ि जाये बता दे॥ 6146॥
3जिस भी अंग पै गोविंद राधे।
4दृष्टि पड़ जाय दृष्टि हटे ना बता दे॥ 6147॥
5बार बार रसमत्त गोविंद राधे।
6लाल को मूर्च्छा सी आये बता दे॥ 6148॥
7बार बार सखिजन गोविंद राधे।
8लाल को करें सावधान बता दे॥ 6149॥
9गौर रूपरस ऐसा गोविंद राधे।
10श्याम रूपरस को भी बौना बना दे॥ 6150॥
11गौर रस में यदि गोविंद राधे।
12श्याम रस मिलि जाये रास बना दे॥ 6151॥
13गौर रूपरस ऐसा गोविंद राधे।
14रस रूप ब्रह्म श्याम को भी डुबा दे॥ 6152॥
15गौर रूपरस ऐसा गोविंद राधे।
16रसरूप श्याम को भिखारी बना दे॥ 6153॥
17गौर रूपरस ऐसा गोविंद राधे।
18विश्व विजयी श्याम को भी हरा दे॥ 6154॥
19गौर रूपरस ऐसा गोविंद राधे।
20कामजित को भी धराशायी बना दे॥ 6155॥
21चम्पक पुष्प जैसी गोविंद राधे।
22कोटि गौरी सम गोरी राधा बता दे॥ 6156॥
23राधा जैसी राधा हैं गोविंद राधे।
24कोटि कोटि काम कमनीय बता दे॥ 6157॥