Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 528
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1प्यारी जू को रूप ऐसो गोविंद राधे।
2तनु रोम रोम प्यास पैदा करा दे॥ 6122॥
3प्यारी जू को रूप ऐसो गोविंद राधे।
4मदनविमोहन को भी लुभा दे॥ 6123॥
5प्रेम के भिखारी कृष्ण गोविंद राधे।
6साहूकार हैं राधारानी बता दे॥ 6124॥
7राधारानी पग पै गोविंद राधे।
8धर गिरिधरहूँ मुकुट बता दे॥ 6125॥
9रँगीली राधा जू गोविंद राधे।
10जहाँ जहाँ धरें पदकमल बता दे॥ 6126॥
11तहाँ तहाँ प्रियतम गोविंद राधे।
12पलकनि देयँ बुहारी बता दे॥ 6127॥
13तहाँ तहाँ प्रियतम गोविंद राधे।
14पदचिह्न बार बार चूमें बता दे॥ 6128॥
15प्रियतम सोचें मन गोविंद राधे।
16जहाँ भी प्यारी पग धारें बता दे॥ 6129॥
17वहाँ की भूमि मैं गोविंद राधे।
18बनूँ तो भाग्य मनाऊँ बता दे॥ 6130॥
19प्रिया पग चिह्नों पै गोविंद राधे।
20पिय का निछावर प्राण बता दे॥ 6131॥
21बार बार देखें दृग गोविंद राधे।
22आनन्दजल बरसावें बता दे॥ 6132॥
23लाली पदचिह्न चहुँ गोविंद राधे।
24लाल दृगभ्रमर मँडरायें बता दे॥ 6133॥