Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 527
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1राधा के कटाक्ष ते गोविंद राधे।
2श्याम मुख निकसे हाय बता दे॥ 6110॥
3राधा के कटाक्ष ते गोविंद राधे।
4श्याम गिरें मुर्छित क्षिति पै बता दे॥ 6111॥
5लाली बिनु लाल को गोविंद राधे।
6एक पलक लगे कलप बता दे॥ 6112॥
7राधे बिनु कल नहिं गोविंद राधे।
8श्याम जियें आधे पलहूँ ना बता दे॥ 6113॥
9दसहूँ दिशा में राधे गोविंद राधे।
10जित देखुँ तित राधे दीखें बता दे॥ 6114॥
11बाटन घाटन गोविंद राधे।
12लतन पतन राधे दीखें बता दे॥ 6115॥
13ऊपर नीचे भी गोविंद राधे।
14सारा जग राधामय दीखे बता दे॥ 6116॥
15वृक्षन बेलिन गोविंद राधे।
16घर आँगन दीखे राधा बता दे॥ 6117॥
17अपलक देखूँ कैसे गोविंद राधे।
18बाधा है नैनों की पलक बता दे॥ 6118॥
19देखूँ तो दृग जल गोविंद राधे।
20बिनु देखे दृगजल आँखें बहा दे॥ 6119॥
21धन्य धन्य सुरपति गोविंद राधे।
22रोम रोम जाके हैं आँखें बता दे॥ 6120॥
23सात्विक भाव शत्रु गोविंद राधे।
24प्यारी को मन भर देखने भी ना दे॥ 6121॥