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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

श्री राधा · पृष्ठ 526

Reading 26 of 452 · Source nos. 6098–6109 · Source PDF 29

1मा अर्थ योग माया गोविंद राधे।

2धव अर्थ प्रियतम सब को बता दे॥ 6098॥

3जिन श्रीकृष्ण की गोविंद राधे।

4पदरज चह उमा रमा भी बता दे॥ 6099॥

5वे श्रीकृष्ण भी गोविंद राधे।

6पदरज चह राधा की बता दे॥ 6100॥

7राधा शब्द अर्थ जाको गोविंद राधे।

8ब्रह्म श्याम आराधे सबको बता दे॥ 6101॥

9राधारानी योगमाया गोविंद राधे।

10राधारानी अधीन कृष्ण हैं बता दे॥ 6102॥

11विधि हरि हर मन गोविंद राधे।

12हरि हरे हरि मन राधा बता दे॥ 6103॥

13कृष्ण माधुर्य पै गोविंद राधे।

14विधि हरि हर भी मोहे बता दे॥ 6104॥

15राधा माधुर्य पै गोविंद राधे।

16स्वमनमोहन कृष्ण मोहे बता दे॥ 6105॥

17राधा के कटाक्ष ते गोविंद राधे।

18श्याम कर ते गिरे मुरली बता दे॥ 6106॥

19राधा के कटाक्ष ते गोविंद राधे।

20मोर मुकुट जाये खिसक बता दे॥ 6107॥

21राधा के कटाक्ष ते गोविंद राधे।

22पीताम्बर स्थानच्युत हो बता दे॥ 6108॥

23राधा के कटाक्ष ते गोविंद राधे।

24श्याम तनु पुनि पुनि कम्प हो बता दे॥ 6109॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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