Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 523
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1पुनि भये मूर्छित गोविंद राधे।
2नारद प्रेमानन्द में बता दे॥ 6062॥
3सखियों ने राधा का गोविंद राधे।
4पादोदक लै छिड़का बता दे॥ 6063॥
5तब नारद की गोविंद राधे।
6गइ मूर्च्छा आई चेतना बता दे॥ 6064॥
7तब कहा सखियों ने गोविंद राधे।
8तुम हो महान भाग्यशाली बता दे॥ 6065॥
9योगेश्वरों के भी गोविंद राधे।
10नारद तुम ईश्वर हो बता दे॥ 6066॥
11राधा का यह रूप गोविंद राधे।
12विधि हरि हर को दुर्लभ बता दे॥ 6067॥
13सखी ने कहा उठो गोविंद राधे।
14राधा की प्रदक्षिणा कर लो बता दे॥ 6068॥
15राधा के चरणों में गोविंद राधे।
16बार बार कर लो प्रणाम बता दे॥ 6069॥
17नारद ने बुलाया गोविंद राधे।
18वृषभानु को कहा धन्य बता दे॥ 6070॥
19आपकी कन्या सम गोविंद राधे।
20कोई नहीं न तो होगी बता दे॥ 6071॥
21यह कन्या तो है गोविंद राधे।
22कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति बता दे॥ 6072॥
23ब्रह्मा विष्णु शंकर गोविंद राधे।
24उमा रमा आदि दास दासी बता दे॥ 6073॥