Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 521
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1नारद ने नवजात गोविंद राधे।
2राधा को देखा भये मुग्ध बता दे॥ 6038॥
3नारद ने राधा को गोविंद राधे।
4गोद में उठा के पाया स्पर्श बता दे॥ 6039॥
5वहीं वृषभानु भी थे गोविंद राधे।
6उनको भेजा किसी काम ते बता दे॥ 6040॥
7दिव्यरूपधारिणी की गोविंद राधे।
8करने लगे पुनि अस्तुति बता दे॥ 6041॥
9नारद बोले आप गोविंद राधे।
10महायोगमयी मायाधीश्वरी बता दे॥ 6042॥
11आपका तेजपुंज गोविंद राधे।
12इन्द्रिय मन बुद्धि पर है बता दे॥ 6043॥
13आपका दिव्य अंग गोविंद राधे।
14सब मन मोहनकर्ता बता दे॥ 6044॥
15आप मधुरतम गोविंद राधे।
16ब्रजरस बरसाने वारी बता दे॥ 6045॥
17आपका हृदय तो गोविंद राधे।
18दिव्य ब्रजरस परिप्लुत है बता दे॥ 6046॥
19मेरे सौभाग्य बड़े गोविंद राधे।
20यासों किया दर्शन मैंने बता दे॥ 6047॥
21सृष्टि स्थिति संहार गोविंद राधे।
22अधिष्ठान आप हो राधा बता दे॥ 6048॥
23विशुद्ध सत्वमयी गोविंद राधे।
24आप ही परा विद्या रूपिणी बता दे॥ 6049॥