Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ब्रजधाम · पृष्ठ 514
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1ब्रज माधुर्य उच्च गोविंद राधे।
2अन्य धाम माधुर्य निम्न बता दे॥ 5980॥
3बैकुण्ठ द्वारिका भी गोविंद राधे।
4कृष्ण धाम किन्तु रस तस ना बता दे॥ 5981॥
5बैकुण्ठ में जायें गोविंद राधे।
6शान्त भाव के कृष्ण भक्त बता दे॥ 5982॥
7बैकुण्ठ में जो जाये गोविंद राधे।
8भक्तों की चार मुक्ति पाये बता दे॥ 5983॥
9बैकुण्ठ में जो जाये गोविंद राधे।
10ब्रजरस हित मुख लार गिरा दे॥ 5984॥
11बैकुण्ठ स्वामिनी भी गोविंद राधे।
12तप करके भी पाईं रास ना बता दे॥ 5985॥
13बैकुण्ठ वास ना दे गोविंद राधे।
14निज दास दासानुदास बना दे॥ 5986॥
15श्रीकृष्ण रस ऐसा गोविंद राधे।
16रमापति रस को भी नीचा दिखा दे॥ 5987॥
17राधारानी रस ऐसा गोविंद राधे।
18लक्ष्मी के रस को भी नीचा दिखा दे॥ 5988॥
19राधारानी रस ऐसा गोविंद राधे।
20रुक्मिणी आदि को भी नीचा दिखा दे॥ 5989॥
21राधा प्रेम महिमा को गोविंद राधे।
22हरि रुक्मिणी गोद लेटे बता दे॥ 5990॥
23रुक्मिणी की गोद लेटे गोविंद राधे।
24हरि रोके राधे राधे राधे राधे गा दे॥ 5991॥