Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ब्रजधाम · पृष्ठ 515
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1रुक्मिणी तो हैं दासी गोविंद राधे।
2स्वामिनी हैं श्यामा श्री कृष्ण की बता दे॥ 5992॥
3राधा कृष्ण सब बोलें गोविंद राधे।
4रुक्मिणी कृष्ण सुनि मुँह बिचका दे॥ 5993॥
5प्रेम हो सकाम जाको गोविंद राधे।
6द्वारिका में रुक्मिणी की दासी बना दे॥ 5994॥
7प्रेम निष्काम जाको गोविंद राधे।
8ब्रज में किशोरी जू की दासी बना दे॥ 5995॥