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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ब्रजधाम · पृष्ठ 511

Reading 12 of 452 · Source nos. 5944–5955 · Source PDF 14

1रूप माधुर्य एक गोविंद राधे।

2एक है वेणु माधुर्य बता दे॥ 5944॥

3चारों माधुर्य गोविंद राधे।

4ब्रज तजि कृष्ण साथ जायँ ना बता दे॥ 5945॥

5ब्रजवासी प्रेम निज गोविंद राधे।

6पुत्र ते अधिक क्यों था कृष्ण में बता दे॥ 5946॥

7कृष्ण तनु चिदानंद गोविंद राधे।

8रोम रोम रस चुये कारण बता दे॥ 5947॥

9धन्य धन्य ब्रजधाम गोविंद राधे।

10ब्रज के निवासी सब बोलें राधे राधे॥ 5948॥

11ब्रजवासी प्रेम देखो गोविंद राधे।

12जग पाल को गोपाल बना दे॥ 5949॥

13ब्रजवासी प्रेम देखो गोविंद राधे।

14जगत पिता को नँदपूत बना दे॥ 5950॥

15जुग जुग जिये जोरी गोविंद राधे।

16बार बार ब्रज ब्रजरस बरसा दे॥ 5951॥

17ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे।

18रस नस नस रस प्यास बढ़ा दे॥ 5952॥

19ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे।

20पिये रोये न पिये रोये बता दे॥ 5953॥

21ब्रजरस रस अस गोविंद राधे।

22रस रस पिये कहे बस ना बता दे॥ 5954॥

23ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे।

24रस कहे और और और पिला दे॥ 5955॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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