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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ब्रजधाम · पृष्ठ 510

Reading 11 of 452 · Source nos. 5932–5943 · Source PDF 13

1वृन्दावन धाम का तो गोविंद राधे।

2चराचर प्रेम में ही मग्न है बता दे॥ 5932॥

3वृन्दावन धाम का तो गोविंद राधे।

4रस है अनिर्वचनीय बता दे॥ 5933॥

5छठी भावना वारे गोविंद राधे।

6वृन्दावन रस के हैं रसिक बता दे॥ 5934॥

7वृन्दावन रस पावें गोविंद राधे।

8राधा के कृपापात्र रसिक बता दे॥ 5935॥

9उर में विराजें नित गोविंद राधे।

10रमा किन्तु ब्रज रस पाईं ना बता दे॥ 5936॥

11बार बार सोचो यह गोविंद राधे।

12एक दिन ब्रजरस पिऊँगा बता दे॥ 5937॥

13ब्रजवासी महिमा तो गोविंद राधे।

14ब्रह्मा ने गाया भूरि भूरि बता दे॥ 5938॥

15ब्रह्मा ने कहा कृष्ण गोविंद राधे।

16मोहिं ब्रज तिर्यक् योनि दिला दे॥ 5939॥

17ब्रह्मा ब्रजवासियों की गोविंद राधे।

18पदरज प्राप्ति सौभाग्य बता दे॥ 5940॥

19ब्रज की महत्ता यह गोविंद राधे।

20ऐश्वर्य छुपि करे सेवा बता दे॥ 5941॥

21ब्रजेन्द्रनन्दन के गोविंद राधे।

22चार माधुर्य ब्रज में ही बता दे॥ 5942॥

23लीला माधुर्य एक गोविंद राधे।

24एक है प्रेम माधुर्य बता दे॥ 5943॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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