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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ब्रजधाम · पृष्ठ 509

Reading 10 of 452 · Source nos. 5920–5931 · Source PDF 12

1वस्तुतस्तु वृन्दावन गोविंद राधे।

2चिन्मय अनन्त कृष्ण सम है बता दे॥ 5920॥

3वृन्दावन अंगना के गोविंद राधे।

4नूपुर चिन्तामणिमय बता दे॥ 5921॥

5तनु शृंगार पुष्प गोविंद राधे।

6वृक्ष हैं सब कल्प वृक्ष बता दे॥ 5922॥

7ब्रजवासियों का धन गोविंद राधे।

8धेनु हैं सब कामधेनु बता दे॥ 5923॥

9वृन्दावन वस्तु गोविंद राधे।

10सत चित आनँदरूप बता दे॥ 5924॥

11चलु मन वृन्दावन गोविंद राधे।

12जा पै सुख बैकुण्ठ लुटा दे॥ 5925॥

13मन रह वृन्दावन गोविंद राधे।

14प्राणधन रह घनश्याम बता दे॥ 5926॥

15सोइ जीवन धनि गोविंद राधे।

16तन मन धन घनश्याम में लगा दे॥ 5927॥

17मन रह वृन्दावन गोविंद राधे।

18तन भल मम वास नरक दिला दे॥ 5928॥

19मन रह वृन्दावन गोविंद राधे।

20तन चौरासी लाख चाहे दिला दे॥ 5929॥

21श्यामा श्याम सखिजन गोविंद राधे।

22प्राणप्यारा वृन्दावन धाम है बता दे॥ 5930॥

23वृन्दावन के तो गोविंद राधे।

24लता गुल्म तरु कृष्णभक्त हैं बता दे॥ 5931॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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