Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ब्रजधाम · पृष्ठ 508
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1स्थूल इन्द्रियों में जैसे गोविंद राधे।
2सूक्ष्म इन्द्रियों का है वास बता दे॥ 5908॥
3ऐसे स्थूल ब्रज में भी गोविंद राधे।
4सूक्ष्म दिव्य चिन्मय ब्रज है बता दे॥ 5909॥
5दिव्य धाम ब्रजधाम गोविंद राधे।
6कृष्णप्रेम बिनु सोउ धाम लाभ ना दे॥ 5910॥
7धामों का मुकुट ब्रज गोविंद राधे।
8ब्रज का मुकुट वृन्दावन है बता दे॥ 5911॥
9ब्रज है कमल जैसा गोविंद राधे।
10वृन्दावन मकरन्द जैसा बता दे॥ 5912॥
11वृन्दावन धाम सम गोविंद राधे।
12अथवा अधिक कोउ धाम ना बता दे॥ 5913॥
13दिव्य धाम वृन्दावन गोविंद राधे।
14रसिकन की रजधानी बता दे॥ 5914॥
15वृन्दावन धाम है गोविंद राधे।
16शक्ति गुण आदि में ज्यों कृष्ण बता दे॥ 5915॥
17वृन्दावन धाम भी है गोविंद राधे।
18कृष्ण के समान दिव्य चिन्मय बता दे॥ 5916॥
19वृन्दावन धाम भी है गोविंद राधे।
20कृष्ण के समान ही सेव्य बता दे॥ 5917॥
21प्राकृत वृन्दावन में गोविंद राधे।
22दिव्य वृन्दावन व्याप्त बता दे॥ 5918॥
23वृन्दावन आठ कोस गोविंद राधे।
24लम्बा चार कोस चौड़ा दीखे बता दे॥ 5919॥