Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 504
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1रागानुगा भक्ति का गोविंद राधे।
2दूसरा नाम अविहिता बता दे॥ 5888॥
3रागानुगा भक्ति में गोविंद राधे।
4रुचि की ही है प्रधानता बता दे॥ 5889॥
5रागानुगा भक्ति को गोविंद राधे।
6किसी विधि की न अपेक्षा बता दे॥ 5890॥
7भक्ति के अनुकूल गोविंद राधे।
8जो भी हो आचरण सोई करा दे॥ 5891॥
9भक्ति के प्रतिकूल गोविंद राधे।
10जो भी हो उदासीन भाव बना दे॥ 5892॥
11भक्ति व्यवधान तीन गोविंद राधे।
12मल विक्षेप आवरण बता दे॥ 5893॥
13मल का निवारण गोविंद राधे।
14भक्ति की तीव्रतम इच्छा बता दे॥ 5894॥
15विक्षेप वारण गोविंद राधे।
16श्रीकृष्ण साधन भक्ति बता दे॥ 5895॥
17आवरण वारण गोविंद राधे।
18कृपा ते स्वरूप शक्ति प्राप्ति बता दे॥ 5896॥
19हिंसा दम्भ मात्सर्य गोविंद राधे।
20भावयुक्त भक्ति है तामसी बता दे॥ 5897॥
21विषय ऐश्वर्य गोविंद राधे।
22भावयुक्त भक्ति है राजसी बता दे॥ 5898॥
23पापक्षय हित अरु गोविंद राधे।
24हरि अर्पण हित सात्विकी बता दे॥ 5899॥