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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 503

Reading 514 of 516 · Source nos. 5876–5887 · Source PDF 520

1जो साधन ते बने गोविंद राधे।

2सिद्ध वे हैं साधन सिद्ध बता दे॥ 5876॥

3उर प्रेम अंकुर गोविंद राधे।

4जिनके वे जातरति साधक बता दे॥ 5877॥

5प्रेम अंकुरहीन गोविंद राधे।

6हैं अजातरति साधक वे बता दे॥ 5878॥

7चारों ही दास्य सख्य गोविंद राधे।

8वात्सल्य माधुर्य भाव के बता दे॥ 5879॥

9वैधी भक्तियुक्त जन गोविंद राधे।

10श्याम मिलन का करें यत्न बता दे॥ 5880॥

11रागानुगा भक्तों ते गोविंद राधे।

12श्याम ही मिलन का करें यत्न बता दे॥ 5881॥

13वैधी भक्ति शास्त्र- गोविंद राधे।

14विधि युक्त याते है दुर्बला बता दे॥ 5882॥

15रागानुगा भक्ति गोविंद राधे।

16विधि ते रहित याते प्रबला बता दे॥ 5883॥

17नरक के भय ते वैधी गोविंद राधे।

18सहज जो भक्ति रागानुगा बतला दे॥ 5884॥

19वैधी रसोइया सम गोविंद राधे।

20रागानुगा माता सम भक्ति बता दे॥ 5885॥

21वैधी में चौंसठ गोविंद राधे।

22नेम, रागानुगा में प्रेम बता दे॥ 5886॥

23दोनों में नव भक्ति गोविंद राधे।

24अरु गुरु शरणागति है बता दे॥ 5887॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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