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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 502

Reading 513 of 516 · Source nos. 5864–5875 · Source PDF 519

1सर्वश्रेष्ठ सिद्धा भक्ति गोविंद राधे।

2रागात्मिका भक्ति ही है बता दे॥ 5864॥

3रागानुगा भक्ति गोविंद राधे।

4आनुगत्यमयी ही होती है बता दे॥ 5865॥

5रागात्मिका भक्ति गोविंद राधे।

6स्वातंत्र्यमयी ही होती है बता दे॥ 5866॥

7रागात्मिका भक्ति गोविंद राधे।

8राधा, ललिता आदि में बता दे॥ 5867॥

9रागात्मिका वारे गोविंद राधे।

10स्वरूप शक्ति के नियन्ता बता दे॥ 5868॥

11रागात्मिका भक्ति गोविंद राधे।

12जीव ते है अप्राप्य बता दे॥ 5869॥

13जीव को तो बस गोविंद राधे।

14रागानुगा भक्ति रसिक बता दे॥ 5870॥

15भक्तों की भक्ति भेद गोविंद राधे।

16वैधी अरु रागानुगा हैं बता दे॥ 5871॥

17पुनि इन दोनों के गोविंद राधे।

18भेद हैं चार चार और बता दे॥ 5872॥

19पार्षद साधनसिद्ध गोविंद राधे।

20जातरति साधक तीसरा बता दे॥ 5873॥

21चौथा है साधक गोविंद राधे।

22नाम अजातरति साधक बता दे॥ 5874॥

23नित्य सिद्ध परिकर गोविंद राधे।

24गोलोक के पार्षद हैं बता दे॥ 5875॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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