Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 501
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1विहित भक्ति ते जैसे गोविंद राधे।
2जीव को सद्गति प्राप्त हो बता दे॥ 5852॥
3वैसे ही काम आदि गोविंद राधे।
4अविहित भक्ति दे सुगति बता दे॥ 5853॥
5दण्डकारण्य मुनि गोविंद राधे।
6अग्नि पुत्र आदि हरिकामी बता दे॥ 5854॥
7काम की कौन कहे गोविंद राधे।
8कृष्ण प्रति द्वेष भय सुगति दिला दे॥ 5855॥
9किसी भी प्रकार ते हो गोविंद राधे।
10मन का निवेश श्रीकृष्ण में बता दे॥ 5856॥
11मन का निवेश ही तो गोविंद राधे।
12जीव को ब्रह्म श्रीकृष्ण ते मिला दे॥ 5857॥
13जाने अनजाने ज्योँ गोविंद राधे।
14विषपान व्यक्ति की मृत्यु करा दे॥ 5858॥
15किसी प्रकार त्योँ गोविंद राधे।
16हरिभक्ति सम्बन्ध पाप नसा दे॥ 5859॥
17शिशुपाल पौन्ड्रक गोविंद राधे।
18शाल्व बैर ते की थी भक्ति बता दे॥ 5860॥
19द्वेष आदि ते तो है गोविंद राधे।
20श्रेष्ठ काम भाव युक्त भक्ति बता दे॥ 5861॥
21काम भाव भक्ति ते है गोविंद राधे।
22श्रेष्ठ शास्त्रीय वैधी भक्ति बता दे॥ 5862॥
23वैधी भक्ति ते भी श्रेष्ठ गोविंद राधे।
24निष्काम रागानुगा है बता दे॥ 5863॥