Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 505
Reading 516 of 516 · Source nos. 5900–5901 · Source PDF 522
1तैलधारावत गोविंद राधे।
2भक्ति निष्काम निर्गुण है बता दे॥ 5900॥
3निर्गुण भक्ति में तो गोविंद राधे।
4वैधी भक्ति नियम अमान्य बता दे॥ 5901॥