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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 498

Reading 509 of 516 · Source nos. 5816–5827 · Source PDF 515

1परकीया भाव में तो गोविंद राधे।

2छुप छुप कर हो मिलन बता दे॥ 5816॥

3परकीया भाव में तो गोविंद राधे।

4सास ससुर प्रतिबन्ध बता दे॥ 5817॥

5परकीया भाव में तो गोविंद राधे।

6आर्य पथ का भी हो त्याग बता दे॥ 5818॥

7परकीया भाव में तो गोविंद राधे।

8कलंक कालिमा का भय हो बता दे॥ 5819॥

9परकीया भाव में तो गोविंद राधे।

10चिन्तन निरन्तर हो आपु ही बता दे॥ 5820॥

11परकीया भाव में तो गोविंद राधे।

12दोष दृष्टि का हो अभाव बता दे॥ 5821॥

13परकीया भाव में तो गोविंद राधे।

14मिलन की प्यास बढ़े छिन छिन बता दे॥ 5822॥

15हरि आलिंगन में गोविंद राधे।

16गोपी रोमांच भी दुखद बता दे॥ 5823॥

17हरि आलिंगन में गोविंद राधे।

18वस्त्र आदि व्यवधान दुखद बता दे॥ 5824॥

19इक टक देखूँ कैसे गोविंद राधे।

20लाज निगोड़ी आ के पलक गिरा दे॥ 5825॥

21अपलक देखूँ कैसे गोविंद राधे।

22निगुरी पलकनि पर्दा गिरा दे॥ 5826॥

23गोपी योगमाया ते गोविंद राधे।

24मोहित हो के कोसा विधि को बता दे॥ 5827॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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