Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 495
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1राधा प्रेम मादन गोविंद राधे।
2ब्रह्म गोविंद को भी दास बना दे॥ 5780॥
3राधा पायें मादन गोविंद राधे।
4लक्ष्मी पायें अनुराग भक्ति बता दे॥ 5781॥
5राधा हैं ब्रजरानी गोविंद राधे।
6लक्ष्मी हैं द्वारिका की रानी बता दे॥ 5782॥
7राधा ने दिया दिया गोविंद राधे।
8लक्ष्मी ने लिया दिया अन्तर बता दे॥ 5783॥
9कृष्ण पटरानियों ने गोविंद राधे।
10कहा साध्वी द्रौपदी ते बता दे॥ 5784॥
11भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ गोविंद राधे।
12हौं नहिं चाहौं स्वप्न में भी बता दे॥ 5785॥
13राधाकुचकुंकुम गोविंद राधे।
14गंधयुत कृष्ण पद धूरि दिला दे॥ 5786॥
15कृष्ण पद धूरि ही है गोविंद राधे।
16रानियों की जीवन मूरि बता दे॥ 5787॥
17श्रीकृष्ण पत्नियाँ थीं गोविंद राधे।
18सोलह हजार एक सौ आठ बता दे॥ 5788॥
19किन्तु उन पत्नियों का गोविंद राधे।
20प्रेम ब्रजगोपी सम ना बता दे॥ 5789॥
21प्रेम की अनेक कोटि गोविंद राधे।
22सर्वश्रेष्ठ कोटि गोपीप्रेम बता दे॥ 5790॥
23गोपीप्रेम में भी श्रेष्ठ गोविंद राधे।
24प्रेमसार महाभाव राधा बता दे॥ 5791॥