Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 494
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1गोपी प्रेम पाना हो तो गोविंद राधे।
2निष्काम माधुर्य भाव बना दे॥ 5768॥
3निष्काम माधुर्य गोविंद राधे।
4भाव सोने में सुहागा बता दे॥ 5769॥
5निष्काम माधुर्य गोविंद राधे।
6सर्वश्रेष्ठ प्रेम महाभाव दिला दे॥ 5770॥
7महाभाव भेद दो हैं गोविंद राधे।
8रूढ़ अधिरूढ़ महाभाव बता दे॥ 5771॥
9रूढ़ अधिरूढ़ में भी गोविंद राधे।
10अधिरूढ़ महाभाव श्रेष्ठ है बता दे॥ 5772॥
11अधिरूढ़ संयोग गोविंद राधे।
12मोदन मादन भेद बता दे॥ 5773॥
13अधिरूढ़ विरह में गोविंद राधे।
14मोहन राधा में ही प्रायः बता दे॥ 5774॥
15मोहन में दिव्योन्माद गोविंद राधे।
16प्रजल्प परिजल्प दस हैं बता दे॥ 5775॥
17विजल्प, उज्जल्प गोविंद राधे।
18संजल्प अरु अवजल्प बता दे॥ 5776॥
19अभिजल्प, आजल्प गोविंद राधे।
20प्रतिजल्प दशम सुजल्प बता दे॥ 5777॥
21भक्ति की मुकुट मनि गोविंद राधे।
22राधा जी की भक्ति मादन बता दे॥ 5778॥
23मादन महाभाव गोविंद राधे।
24केवल श्री राधारानी में है बता दे॥ 5779॥