Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 492
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1मंजिष्ठा राग भी है गोविंद राधे।
2प्रतिक्षण ही वर्धमान बता दे॥ 5744॥
3मंजिष्ठा राग को तो गोविंद राधे।
4अन्य हेतु की ना अपेक्षा बता दे॥ 5745॥
5मंजिष्ठा राग तो गोविंद राधे।
6राधा माधव में स्थित है बता दे॥ 5746॥
7मंजिष्ठा राग तो गोविंद राधे।
8स्वयं प्रकट हो बढ़े भी बता दे॥ 5747॥
9कुसुमिका राग वह गोविंद राधे।
10जो कुसुंभ फूल के रंग सा बता दे॥ 5748॥
11कुसुंभ फूल का गोविंद राधे।
12रंग पक्का नाहिं होता बता दे॥ 5749॥
13कुसुंभ फूल को गोविंद राधे।
14कषाय वस्तु मिलि पक्का बना दे॥ 5750॥
15वैसे ही कुसुमिका राग गोविंद राधे।
16कृष्ण सौन्दर्य लखि बाढ़े बता दे॥ 5751॥
17शिरीषा राग वह गोविंद राधे।
18शिरीषा पुष्प सा क्षणिक बता दे॥ 5752॥
19शिरीषा पुष्प में तो गोविंद राधे।
20पीली सी आभा हो क्षणिक बता दे॥ 5753॥
21शिरीषा राग तो गोविंद राधे।
22संयोग में ही हो प्रकट बता दे॥ 5754॥
23शिरीषा राग तो गोविंद राधे।
24हरि वियोग में हो क्षीण बता दे॥ 5755॥