Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 489
Reading 500 of 516 · Source nos. 5708–5719 · Source PDF 506
1नाम गान में सतत गोविंद राधे।
2रस मिले नाम गान रुचि है बता दे॥ 5708॥
3सबको दे मान आपु गोविंद राधे।
4चाहे न मान मानशून्यता बता दे॥ 5709॥
5अवशि मिलेगा प्रेम गोविंद राधे।
6दृढ़ विश्वास आशाबंध बता दे॥ 5710॥
7हरि गुण में हो मत्त गोविंद राधे।
8सोइ गुणगण आसक्ति बता दे॥ 5711॥
9कृष्ण दरस हेतु गोविंद राधे।
10तीव्र इच्छा समुत्कंठा बता दे॥ 5712॥
11वृन्दावनादि धाम गोविंद राधे।
12वास इच्छा धामवास प्रीति बता दे॥ 5713॥
13भावभक्ति में तो गोविंद राधे।
14ममता की हो अति वृद्धि बता दे॥ 5714॥
15भावभक्ति में तो गोविंद राधे।
16ईश्वरत्व बुद्धि हो क्षीण बता दे॥ 5715॥
17भावभक्ति ही गोविंद राधे।
18होके प्रगाढ़ प्रेमाभक्ति बना दे॥ 5716॥
19भाव पक्व दशा नाम गोविंद राधे।
20श्रीकृष्ण का शुद्ध प्रेम है बता दे॥ 5717॥
21किसी भी विघ्न द्वारा गोविंद राधे।
22रंचमात्र घटे ना प्रेम बता दे॥ 5718॥
23प्रेम के आगे भी गोविंद राधे।
24प्रेम की अनेक कोटियाँ हैं बता दे॥ 5719॥