Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 488
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1वही है प्रेम भक्ति गोविंद राधे।
2श्रीकृष्णाकर्षिणी ही बता दे॥ 5696॥
3श्रवण कीर्तनादि गोविंद राधे।
4भक्ति है साधन भक्ति बता दे॥ 5697॥
5मिलन की प्यास अरु गोविंद राधे।
6रूपध्यान साधन भक्ति बता दे॥ 5698॥
7साधन भक्ति द्वारा गोविंद राधे।
8भाव प्रेम भक्ति है साध्य बता दे॥ 5699॥
9यही श्रवणादि भक्ति गोविंद राधे।
10पक्व हो के भावभक्ति बनती बता दे॥ 5700॥
11भाव का नाम रति गोविंद राधे।
12भाव अनुभाव नौ प्रकार का बता दे॥ 5701॥
13क्षांति विरक्ति अरु गोविंद राधे।
14अव्यर्थकालत्व अंकुर बता दे॥ 5702॥
15नामगान में रुचि गोविंद राधे।
16मानशून्यता आशाबंध बता दे॥ 5703॥
17गुणकथन आसक्ति गोविंद राधे।
18समुत्कंठा धामवासप्रीति बता दे॥ 5704॥
19क्षोभ का कारण हो गोविंद राधे।
20तो भी ना क्षोभ हो क्षांति बता दे॥ 5705॥
21लोक परलोक के गोविंद राधे।
22सुखों ते अरुचि विरक्ति बता दे॥ 5706॥
23सदा करे हरि स्मरण गोविंद राधे।
24यही अव्यर्थकालत्व है बता दे॥ 5707॥