Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 487
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1भाव भक्ति में दूजा गोविंद राधे।
2सुदुर्लभा गुण प्रमुख बता दे॥ 5684॥
3सुदुर्लभा अर्थ यह गोविंद राधे।
4भुक्ति मुक्ति दें भक्ति ना दें बता दे॥ 5685॥
5साधन भक्ति के भी गोविंद राधे।
6दो गुण हैं भाव भक्ति में बता दे॥ 5686॥
7जैसे आकाश गुण गोविंद राधे।
8वायु में अन्तर्निहित बता दे॥ 5687॥
9आकाश वायु गुण गोविंद राधे।
10तेज में अन्तर्निहित बता दे॥ 5688॥
11ऐसे साधन भक्ति गोविंद राधे।
12गुण रहें भाव भक्ति में भी बता दे॥ 5689॥
13साधन भाव भक्ति गोविंद राधे।
14गुण रहें प्रेमभक्ति में भी बता दे॥ 5690॥
15प्रेमभक्ति गुण सान्द्रा-गोविंद राधे।
16नन्द विशेषात्मा है बता दे॥ 5691॥
17कोटि कोटि ब्रह्मानन्द गोविंद राधे।
18प्रेमानन्द बिन्दु के सम ना बता दे॥ 5692॥
19यही अर्थ सान्द्रानन्द गोविंद राधे।
20विशेषात्मा गुण का है बता दे॥ 5693॥
21प्रेम भक्ति गुण दूजा गोविंद राधे।
22श्रीकृष्णाकर्षिणी है बता दे॥ 5694॥
23सब प्रिय जन सँग गोविंद राधे।
24कृष्ण को जो भक्ति वश में करा दे॥ 5695॥