Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 485
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1एक दो सात्विक भाव गोविंद राधे।
2प्रकट हों तो धूमायित बता दे॥ 5660॥
3दो तीन सात्विक भाव गोविंद राधे।
4प्रकट हों तो उसे ज्वलित बता दे॥ 5661॥
5चार पाँच सात्विक भाव गोविंद राधे।
6प्रकट हों तो उसे दीप्त बता दे॥ 5662॥
7सात आठ सात्विक भाव गोविंद राधे।
8प्रकट हों तो उद्दीप्त बता दे॥ 5663॥
9यही उद्दीप्त भाव गोविंद राधे।
10महाभाव में सूद्दीप्त बता दे॥ 5664॥
11उत्तमा भक्ति के गोविंद राधे।
12भेद हैं तीन मुख्य शास्त्र बता दे॥ 5665॥
13एक है साधन भक्ति गोविंद राधे।
14एक भाव एक प्रेमा भक्ति बता दे॥ 5666॥
15मन इन्द्रियों ते जो हो गोविंद राधे।
16भक्ति साधन भक्ति नवधा बता दे॥ 5667॥
17साधन भक्ति गुण गोविंद राधे।
18क्लेशघ्नी अरु शुभदा बता दे॥ 5668॥
19क्लेश के प्रकार तीन गोविंद राधे।
20पाप अरु वासना, अविद्या बता दे॥ 5669॥
21पाप के भेद दो हैं गोविंद राधे।
22प्रारब्ध, प्रारब्ध रहित बता दे॥ 5670॥
23जिसका फल मिल रहा है गोविंद राधे।
24वह पाप प्रारब्धजन्य बता दे॥ 5671॥