Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 484
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1समर्था रति तो गोविंद राधे।
2सर्वोच्च भक्ति महाभाव दिला दे॥ 5648॥
3नर का है चार भाव गोविंद राधे।
4दास्यादि स्वसुख वासना का बता दे॥ 5649॥
5हरि का भी चार भाव गोविंद राधे।
6दास्य आदि जीव हित दिव्य बता दे॥ 5650॥
7दास्य सख्य वात्सल्य गोविंद राधे।
8सम्बन्धानुगा है भक्ति बता दे॥ 5651॥
9माधुर्य भाव की तो गोविंद राधे।
10कृष्ण भक्ति कामानुगा है बता दे॥ 5652॥
11कामानुगा दो हैं गोविंद राधे।
12निजसुख अरु पिय का सुख बता दे॥ 5653॥
13स्वसुखवासनाभक्ति गोविंद राधे।
14द्वारिका की महिषी की दासी बना दे॥ 5654॥
15प्रिय सुख वासना है गोविंद राधे।
16श्रेष्ठ ब्रज गोपियों की दासी बना दे॥ 5655॥
17स्तम्भ स्वेद रोमांच गोविंद राधे।
18वैवर्ण्य सात्विक भाव बता दे॥ 5656॥
19स्वरभेद अश्रु कम्प गोविंद राधे।
20मूर्च्छा आठ सात्विक भाव बता दे॥ 5657॥
21दास्य सख्य माधुर्य गोविंद राधे।
22भाव में आठ सात्विक भाव बता दे॥ 5658॥
23वात्सल्य भाव में तो गोविंद राधे।
24एक भाव और स्तन-दुग्ध बता दे॥ 5659॥