Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 483
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1दूजी है चिन्तामणि गोविंद राधे।
2तीसरी कौस्तुभ मणि है बता दे॥ 5636॥
3साधारण मणि गोविंद राधे।
4सम प्रेम है कुब्जा का बता दे॥ 5637॥
5चिन्तामणि सम प्रेम गोविंद राधे।
6रुक्मिणी आदि रानियों का बता दे॥ 5638॥
7कौस्तुभ मणि सम गोविंद राधे।
8प्रेम निष्काम गोपियों का बता दे॥ 5639॥
9साधारणी रति गोविंद राधे।
10कुब्जा आदि की थी सकाम बता दे॥ 5640॥
11समंजसा रति गोविंद राधे।
12रुक्मिणी आदि रानियों की बता दे॥ 5641॥
13समर्था रति तो गोविंद राधे।
14ब्रजांगनाओं की थी बता दे॥ 5642॥
15जो निजसुख ही चह गोविंद राधे।
16सोइ साधारणी रति है बता दे॥ 5643॥
17जो निजसुख अरु गोविंद राधे।
18पियसुख चाहे सो समंजसा बता दे॥ 5644॥
19जो पियसुख चाहे गोविंद राधे।
20सो है समर्था रति की बता दे॥ 5645॥
21साधारणी रति गोविंद राधे।
22प्रेमाभक्ति तक जाये बता दे॥ 5646॥
23समंजसा रति गोविंद राधे।
24अनुराग भक्ति तक जाये बता दे॥ 5647॥