Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 480
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1सर्वश्रेष्ठ वास कौन गोविंद राधे।
2राय कहें हरि लीला धाम बता दे॥ 5600॥
3सर्वश्रेष्ठ श्रवण कौन गोविंद राधे।
4राय कहें राधा कृष्ण लीला बता दे॥ 5601॥
5भक्ति के पाँच भाव गोविंद राधे।
6शान्त, दास्य, सख्य, वत्सल, मधुर बता दे॥ 5602॥
7शांत भाव निष्ठायुत गोविंद राधे।
8मिले बैकुण्ठ धाम सुख ही बता दे॥ 5603॥
9दास्य भाव में सदा गोविंद राधे।
10निष्ठा अरु सेवा दोनों बता दे॥ 5604॥
11सख्य भाव में तो है गोविंद राधे।
12निष्ठा सेवा विश्रम्भ तीनों बता दे॥ 5605॥
13वात्सल्य में है निष्ठा गोविंद राधे।
14सेवा विश्रम्भ ममता बता दे॥ 5606॥
15माधुर्य में हैं चारों गोविंद राधे।
16पाँचवाँ है आत्म समर्पण बता दे॥ 5607॥
17भक्ति के पाँच भाव गोविंद राधे।
18आकाश आदि के समान बता दे॥ 5608॥
19आकाश का है गुण गोविंद राधे।
20केवल शब्द, शान्त भाव यों बता दे॥ 5609॥
21वायु में शब्द स्पर्श गोविंद राधे।
22ऐसे दास्य में शान्त दास्य बता दे॥ 5610॥
23तेज में शब्द स्पर्श गोविंद राधे।
24रूप, यों सख्य तीन भाव का बता दे॥ 5611॥