Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 478
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1राय ने बताया यह गोविंद राधे।
2वर्णाश्रम धर्म है साध्य बता दे॥ 5576॥
3चैतन्य प्रश्न पुनि गोविंद राधे।
4धर्म कर्म तो स्वर्ग नश्वर दिला दे॥ 5577॥
5पुनि राय ने बताया गोविंद राधे।
6हरि के निमित्त कर्म सिद्घि दिला दे॥ 5578॥
7चैतन्य प्रश्न पुनि गोविंद राधे।
8यह तो कर्मबन्धन मात्र ते छुड़ा दे॥ 5579॥
9पुनि राय ने बताया गोविंद राधे।
10धर्म तजि हरि भज पाप नसा दे॥ 5580॥
11चैतन्य प्रश्न पुनि गोविंद राधे।
12यह साधन पाप नाश ही करा दे॥ 5581॥
13पुनि राय ने बताया गोविंद राधे।
14ब्रह्मभूत को परा भक्ति दिला दे॥ 5582॥
15चैतन्य प्रश्न पुनि गोविंद राधे।
16यह ज्ञानयुक्त भक्ति मुक्ति दिला दे॥ 5583॥
17पुनि राय ने बताया गोविंद राधे।
18केवल कृष्णभक्ति साध्य दिला दे॥ 5584॥
19चैतन्य प्रश्न पुनि गोविंद राधे।
20यह है समीचीन आगे बता दे॥ 5585॥
21राय बोले दास्य सख्य गोविंद राधे।
22वात्सल्य माधुर्य भाव बना दे॥ 5586॥
23चैतन्य प्रश्न पुनि गोविंद राधे।
24इन चार भावों में श्रेष्ठ बता दे॥ 5587॥